पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी की बड़ी चुनावी सफलता ने देश की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। Mamata Banerjee के मजबूत माने जाने वाले राजनीतिक गढ़ में बीजेपी की एंट्री को बड़ा बदलाव माना जा रहा है। इस जीत के बाद पार्टी कार्यकर्ताओं में उत्साह है, वहीं विपक्षी दलों में चिंतन का दौर शुरू हो गया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बंगाल के नतीजों का असर पड़ोसी Jharkhand पर भी पड़ सकता है। दोनों राज्यों की सामाजिक और राजनीतिक परिस्थितियों में समानता होने के कारण यहां भी समीकरण बदलने की संभावनाएं जताई जा रही हैं।
झारखंड में दिखने लगे असर के संकेत
झारखंड की सियासत में इस समय अंदरूनी हलचल तेज होती दिख रही है। Indian National Congress के भीतर मतभेद खुलकर सामने आने लगे हैं।
प्रदेश के वरिष्ठ नेता और मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने संगठन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं, जबकि स्वास्थ्य मंत्री Irfan Ansari ने भी असंतोष जाहिर किया है।
झामुमो-कांग्रेस रिश्तों में खटास
Jharkhand Mukti Morcha और कांग्रेस के बीच संबंधों में भी खटास की चर्चाएं तेज हो गई हैं। बंगाल और असम में कांग्रेस के कमजोर प्रदर्शन के बाद सहयोगी दलों का भरोसा कुछ हद तक डगमगाता नजर आ रहा है।
सीट बंटवारे और चुनावी रणनीति को लेकर पहले से चली आ रही असहमति अब ज्यादा खुलकर सामने आ रही है।
गठबंधन में असहज स्थिति
बंगाल चुनाव के दौरान एक तरफ Hemant Soren ममता बनर्जी के समर्थन में प्रचार कर रहे थे, वहीं उनकी सरकार में शामिल कांग्रेस के नेता अपने उम्मीदवारों के पक्ष में प्रचार में जुटे थे।
चुनाव परिणाम उम्मीदों के मुताबिक नहीं आने के बाद गठबंधन में असहजता और बढ़ गई है। हालांकि, अब तक किसी बड़े नेता ने खुलकर बयान नहीं दिया है, लेकिन झामुमो नेताओं के संकेतों से तनाव साफ नजर आ रहा है।
आगे क्या?
फिलहाल, बंगाल के नतीजों के बाद झारखंड की राजनीति किस दिशा में जाएगी, इस पर सभी की नजरें टिकी हैं। आने वाले समय में गठबंधन की मजबूती, सीट समीकरण और नेतृत्व की भूमिका तय करेगी कि राज्य की सियासत में कितना बदलाव आता है।